छोटी मुलाकात बड़ी बात

  दिल्ली के प्रगति मैदान में विश्वपुस्तक मेला-2018 का आयोजन हो रहा है। बचपन से ही मुझे किताबें अपनी ओर खींचती है। इसलिए पुस्तक मेला हो और मैं न जाऊ ऐसा मश्किल है। मैंने अपने दफ्तर के अवकाश के दिन वहां जाना तय किया। इस विषय में अपने मित्र श्रवण से बात की तो वह […]

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रोहित के सवाल पर बवाल क्यों ?

    विचार डेस्कः मशहूर पत्रकार रोहित सरदाना के एक ट्वीट पर बहुत बवाल होते देखा तो विचार किया कि ट्वीट को फिर से पढ़ लिया जाए। रोहित सरदाना ने ट्वीट में पांच नामों का जिक्र किया है- राधा, दुर्गा, फातिमा, आयशा और मैरी। यहां तक तो सब ठीक था पर कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों से सवाल पूछते हुए रोहित […]

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गौरी लंकेश की हत्या…

मैं पेशे से पत्रकार हूं इसलिए आज जब किसी पत्रकार की हत्या की खबर सुनता हूं तो मुझे ऐसे लगता है जैसे मेरे ऊपर ही हमला हुआ हो । गौरी लंकेश की हत्या जिसने भी की है, वह अपराधी है। उसे हर कीमत पर सजा मिलनी ही चाहिए। इसमें कोई दोराय नहीं है। किसी की […]

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आज राजनीति मतलब ‘राज’ करने की ‘नीति’

बिहार के ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आज के दौर की राजनीति में कोई सिद्धान्त नही हैं। आज राजनीति केवल ‘राज’ करने की ‘नीति’ तक सीमित हो गई है। सिद्धान्त का झुनझुना जनता को बहलाने का बस साधन भर है ।  राजनीति के पंडित आज नीतीश के कदम पर […]

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असफलता से सफलता की ओर

आज दुनिया पहले की तुलना में काफी बदल चुकी है। हर दिन के साथ, इसके बदलने की रफ्तार बढ़ती ही जा रही है। बदलाव संसार का नियम भी है और जरूरत भी। उसी तरह, कुछ लोग किसी की सफलता और असफलता का पैमाना किसी एक हार जीत से लगाने लग जाते है। यही दबाव व्यक्ति […]

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अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला

अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले ने एक बात तो तय कर दी है कि अब हमले की कड़ी निंदा करने का समय निकल गया है बल्कि कड़े फैसले लेने का समय आ गया है। आए दिन हो रहे आंतकी हमलों मे मरते जवानों से भारतीय जनता का सब्र अब टूट रहा है। विपक्ष में […]

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नारों में सिमटा ‘बेटी पढ़ाओं बेटी बचाओं’ अभियान

हम ‘बेटी पढ़ाओं बेटी बचाओं’ का खूब नारा लगाते हैं पर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। बिहार के बेगूसराय की घटना जिसमें स्कूल की दो छोटी बच्चियों की ड़्रेस उतरवाकर उन्हें अंड़रगार्मेंटस में ही घर भेज दिया गया, क्योंकि गरीब पिता ने यूनिफॉर्म की राशि समय पर जमा नहीं कराई। इस तरह की घटना […]

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आंदोलन का ट्रेंड़

मुझे आज कल एक चीज बहुत महसूस हो रही है शायद आपको भी हो रही होगी शायद नहीं भी कि अन्ना आंदोलन के बाद हमारे देश मे आंदोलन करने का एक ट्रेंड निकल पड़ा। हर दो चार महिने बाद कोई भी कही भी खड़े होकर तीन-चार अपनी पसंद के नारे लगाता है, विरोध करता है। […]

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कूड़े में भविष्य तलाशता बचपन…

बचपन और खेल एक दूसरे के पूरक माने जाते है। बच्चें जहां हो, जैसे हो वह खेल व खेलने का समय ढूंढ ही लेते है। चाहे वह पढ़ाई करते हो या घर की मजबूरी के चलते मजदूरी, वह खेलना नहीं भूलते। लेकिन कुछ बच्चों का बचपना बाल मजदूरी की भेंट चढ़ जाता हैं। मां-बाप का […]

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शब्बीरपुर हिंसा के पीछे का सच

महाराणा प्रताप की जयंती मनाने के लिए 5 मई को शब्बीरपुर के 20-25 युवक तेज आवाज में गाना बजाते हुए, पास के ही शिमलाना गांव जा रहे थे। शब्बीरपुर गांव के प्रधान ने तेज आवाज पर आपत्ति जताई व अपने साथियों समेत उसे रोकने की कोशिश की साथ ही पुलिस को इस बाबत सूचना दे दी। प्रधान […]

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