जवाहर लाल यूनिवर्सिटी को भारत की बहुत ही अच्छी यूनिवर्सिटी में माना जाता है। सुनकर अच्छा लगता है। यंहा के विद्यार्थियों को किसी भी विषय पर बोलने और तर्क रखना सिखाया जाता है। सभी बातो को अगर एक पंक्ति में कहा जाए तो उन्हें नेता बनाया जाता है जो तार्किक हो। जे ऐन यु से बहुत ही बुद्धिमान लोग निकलते है जो आगे चलकर देश का अगल अलग स्तर पर नेतृत्व करते है, ऐसा तर्क दिया जाता है।
उर्मिलेश उर्मिल एक वरिष्ठ पत्रकार है। आप जे एन यु के बारे में कहते है के यंहा से 2000 लोग अभी हाल ही में आईएएस बने है और आप सभी जे एन यु पर सवाल खड़ा कर रहे है ? यह तर्क इतना कमजोर है और साथ में यह हर भारतीय के लिए एक चेतावनी भी है। जरा सोच कर देखिये अगर इस तरह की विचार धारा वाले लोग इतने महत्वपूर्ण पदो पर जाते है तो भारत को कितना बड़ा नुक्सान पंहुचा सकते है ?
सवालो और आजादी की भी अपनी सीमा होती है। चलो एक सामान्य उदहारण से इसे समझते है। अगर कोई आपकी माँ को गाली दे और आपकी माता के सौ टुकड़े करने की बात करे तो आप उस पर क्या प्रतिक्रिया देंगे ? कुछ लोग कहते है यह उसकी आजादी है और वह आपके घर भी रहे और आप की बर्बादी के नारे लगाए और ऐसी ही कामना करे। तब आप क्या करेंगे ? ऐसा वह हर साल करे और वह आपको बर्बाद करने वालो का साथ दे। व्यवहार से नहीं तो विचार से। इसके सवाल जवाब को आप जे एन यु के सन्दर्भ में रख कर सोचिये। इसका उत्तर आपका अपना नजरिया ही तय करेगा।
पहली बात जे एन यु पर और उसके सभी विधार्थियो पर कोई सवाल नहीं उठा रहा है। सवाल उन पर उठाया जा रहा है जो 9 फरवरी को देश को तोड़ने और टुकड़े करने के नारे लगा रहे थे। कुछ विद्यार्थी और महानुभाव तर्क दे रहे थे कि पुलिस की कैंपस में आकर इस तरह की कार्यवाही सही नहीं है। सीधे कैंपस में पुलिस की कार्यवाही गलत है। क्या जे एन यु इस देश का हिस्सा नहीं है ? जो पुलिस अपना कार्यवाही नहीं कर सकती। जे एन यु में इस तरह के कार्यक्रम पहले भी हुए है। तब पुलिस कार्यवाही नहीं हुई थी लेकिन उस समय आपने क्या कदम उठाए थे कि ऐसा दुबारा न हो। इस तरह का आयोजन तीसरी बार हुआ है और हर साल होता है। उमर खालिद जो इस कार्यक्रम का आयोजक था। इसके तीसरे साल सफलतापूर्वक होने के लिए अपने साथियो को बधाई देता है। तब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने क्या किया ? इसका जवाब तलाशिये आप खुद जो लोग पुलिस कार्यवाही पर सवाल उठा रहे है। उन से भी पूछिये।
जो लोग आज देशविरोधियो के समर्थन में सड़को पर आ रहे है वे तब कहा होते है ? देश को गाली दी जाती है। इसे तोड़ने और इसके बर्बाद होने की कामनाए की जाती है। जे एन यु का नाम ख़राब हो रहा है इसे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। ये तर्क दिया जा रहा है। मै कहता हूँ बौद्धिक रूप से दिवालिये पन के शिकार है ये जे एन यु के कुछ विधार्थी और उनके प्रोफेसर। क्या जे एन यु इस देश से बड़ा हो गया है ? यह सवाल आप सभी अपने से और उन सभी से करे जो जे एन यु के पक्ष में खड़े होने के बहाने देश को तोड़ने वाले और वाली विचार धारा का समर्थन कर रहे है।



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