तुम गिला करते तो अच्छा था

बेरंग सी है जिंदगी कुछ रंग की तलाश में,आज मैं भी निकला हूं अपने वक्त की तलाश में, कहते तो हैं सब हम तेरे हैं, निकल जाते सब मौजों की तलाश में, पलट कर मैंने भी कभी देखा नहीं,जिसनें जाना है, क्यों नम आंख हो उसकी आस में, मैं देता वही हूं जो मिलता है […]

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क्या चाहता हूं मैं आसमां या ज़मी

क्या चाहता हूं मैं, आसमां या ज़मी, क्यों मुस्कुराता हूं मैं, क्यों हैं ये हंसी। जंमी पर आसमां के सपने है मेरे, जब थकता हूं याद आती हैं ये जंमी। उलझनों में उलझा रहता हूं, मंजिल की तलाश में,कभी हार हैं कभी जीत मैं उदास क्यों हूं, मैं इसकी तलाश में हूं किस फेर में […]

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न खुद को अकेला समझ, न ढूंढ ठिकाना रोने का

न खुद को अकेला समझ, न ढूंढ ठिकाना रोने का, ये वक्त मिला है तुझ को, कुछ बनने का कुछ होने का, ठुकरा दे आशाएं सबकी, कुछ कहने की कुछ समझाने की, ये आग दिल में जगाए ऱख, कुछ बनने की कुछ होने की, रख हौसला खुद पर, न घबरा विपत्तियों के वार से जीती […]

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सीमा पर मरता सैनिक, एक परिवार उजड़ गया

सीमा पर मरता सैनिक, एक परिवार उजड़ गया,   तुम कहते रहे, कडा जवाब, अब तक तुमने क्या किया, कहां गई वो बाते, जो अब से पहले होती थी,   जब चलती थी गोली सीमा पर,  तीखी बोली होती थी, किसका डर और क्या है ड़र, ये आज हमें तुम बतलाओ, इकोनॉमी के चक्कर में, […]

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दोस्ती का मैं तुझे क्या पैगाम दूँ

दोस्ती का मैं तुझे क्या पैगाम दूँ,  तू समझता है मुझे, मैं तुझे क्या इनाम दूँ, सारी दुनिया वो देखती, जो दीखता हूँ इक तू ही हैं जो मैं हूँ, वो मैं हूँ।। Note – इस कविता से जुड़े सर्वाधिकार रवि प्रताप सिंह के पास हैं। बिना उनकी लिखित अनुमति के कविता के किसी भी हिस्से को […]

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तमाम उम्र गवा दी नाराजगी में

तमाम उम्र गवा दी नाराजगी में , जिनसें नाराज हुए, उन्हें इल्म तक नही , बहुत छोटी है जिंदगी इन बातो के लिये  कुछ तुम चलो, कुछ हम चले, संवाद न हो तो कोई बात नही  बैठ पास कुछ  तुम कहो, कुछ हम कहे, भूल जाओ किस ने क्या कहा  कुछ हम मिले कुछ तुम […]

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कोई दर्द देख बढ़ता है आगे

कोई दर्द देख बढ़ता है आगे, कोई दर्द में भी देखता है फायदे, कोई छोड़ देता है रोता  किसी को,  कोई लेता है चित्र, ओर  बेचता किसी को, कोई उठाता है रोते हुए को, कोई छोड़ता है रोते सभी को,  ये दुनिया के दस्तूर, ये दुनिया की बाते,  कोई ढूंढ लेता है, इसमें भी खुद को॥   Note […]

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अपनी पहचान की तलाश में निकल पड़ा हूँ

अपनी पहचान की तलाश में निकल पड़ा हूँ,  मंजिले न सही रास्ते तो है, क्यों रोक रखा था मैंने खुद को, औरो के लिए,  जाने के बाद कौन याद रखता है, रास्ते के सहारे मंजिले कब तक ढूंढेगे,  जब रास्ते ही मंजिले बन जाए, तो क्या कहने, कौन चला है किसके पीछे,,  बस एक भीड़ […]

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नहीं रूठता अब दिल किसी से, ना चाहत है अब मनाने की

नहीं रूठता अब दिल किसी से, ना चाहत है अब मनाने की,  टुकड़ो में है अब जिंदगी, ना हसरत रही कुछ पाने की, जी रहा हूँ सिर्फ जीने के लिए, आदत नहीं है हार जाने की, है ख्याल अब भी कि कुछ तो होगा, जिंदगी यु ना चलती सबक बनाने की,  क्या खोया क्या पाया, अब वक़्त कहाँ ये दांस्ता […]

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कुछ तो सचाई है मेरी बातो में, के कुछ लोग कहते है मै इंसा बुरा हूँ

कुछ तो सचाई है मेरी बातो में, के कुछ लोग कहते है मै इंसा बुरा हूँ, जिन्होंने जख्म दिए इस गुलिस्ता को, वही हर फूल पर आंसू बहाते है, जो जिये दिखावे की जिन्दगी उम्र भर, वही हमे आइना दिखाते है, जिन्हें फर्क नहीं मालूम धर्म और पंथ का, वही अक्सर चिराग लिए पथ दिखाते है, छोड़ दी है […]

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