पापा मैं अब बड़ा हो गया हूं

पापा मैं अब बड़ा हो गया हूं,मै आप जैसा हूं या आप हो गया हूं,सब लोग बोलते है बाप पर गया हैआप को लगता है, मैं आप पर गया हूंमेरी नादानियों के मौन गवाह हैं आप,जानते हुए भी अंजान हैं आप,कितनी ही मुश्किलों से लड़ा हूं मैं,जानता था कि पीछे खड़े हैं आप,मैं कितना सीखा […]

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कहीं किसान मरा

  गजब का माहौल हो गया, कहीं किसान मरा, कहीं राजनीतिक गोल हो गया, परिवार की फिक्र किसे, वोटो का ये धंधा है, आँखे तो सबकी है, इंसान अब अंधा है, गरीब के हिस्से भूख आई, अमीर के हिस्से रोटी, जिसको जितनी चाहिए उसकी ही किस्मत खोटी, सत्ता और विपक्ष में, मचा घमासान है, होना-वोना कुछ […]

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दोस्ती महज अफवाह है साहब

जो चाहा तुम में मिला नहीं वरना,मिलने में कसर कोई बची नहीं,जब छोड़ चुके थे साथ तेरा हम ऐसी कोई कमी नहीं जो तुम्हें हम में मिली नहीं, ऐसा भी नहीं की हमने बहुत चाहा तुमसे                      बस हमारी तबियत तुमसे मिली नहीं, दोस्तों के आगें तुम मुझे बदनाम […]

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जब तक सांस है मेरी, तब तक

मैं दर्द में खामोश हूं, मेरा चिल्लाना तुमने सुना होगा, तुम कहां हो, या अनजान बन गए हो तुम, मैं शब्द में नहीं हूं, ना कभी रहा हूँ मैं, मुझे भावनाओं में सुन सकती हो तुम,                      शायद सुना भी हो            […]

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वरना ये मुल्क मेरा, मेरा न रहेगा

आंखे बंद कर हजारों सपने लिए बैठे हैं,मेरे दोस्त मेरे लिए गुलदस्ता लिए बैठे हैं,कुछ शिकायत करते हैं मुल्क से खुद हजारों खंजर लिए बैठे हैंअब डर लगता है साहेब देश में खुद के दामन में कांटे लिए बैठे हैं,जो सिखाते हैं अमन का पाठ हमें वो अपने हाथ खून से रंगे बैठे हैं,सच्चाई कोई […]

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दौड़ है दौड़ है बस दौड़

दौड़ है दौड़ है बस दौड़, जाना कहां, किस ओर है, कामयाबी का रास्ता जानता हूं, कहां है? उस ओर है, पहचानता हूं, स्वाभिमान, सिद्धांत दूसरी ओर हैं, जाते देख रहा हूं सभी को, यार दोस्त दुनिया को, मैं खड़ा अकेला बीच में,  कुछ आशाओं के साथ, कहां जाऊं? इस उलझन के साथ, आवाज देते […]

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देश नहीं तू प्राण है मेरा

देश नहीं तू प्राण है मेरा जमीं नहीं अभिमान है मेरा, सब को तुने खुद में समाया, ऐसा ह्रदय कहां से लाया , भाषा, धर्म, गोद में पलें हैं, विश्व को तुने बिरले दिये हैं, तेरी धरा पर राम हुए हैं मर्यादा के शिखर छुए हैं, कृष्णा ने यहां जन्म लिया है, कर्म का संदेश […]

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वो पूछती है क्या सच में जुदा होंगे हम

वो पूछती है क्या सच में जुदा होंगे हम, मैंने कहा वक्त का सितम वक्त पर छोड़ दे,थोड़ा पास बैठ थोड़ा पहलु में रोन दे,समझ है उसे, की ये हो नहीं सकता,ख्वाब का जीवन है, जीना चाहती है वो,पूरी जिन्दगी न सही, कुछ पल चाहती है वो,रो बैठती है कभी-कभी,जब हौंसला टूटता है,मुझको पास रख […]

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अब मंजिल से मेरी नज़र हटती नहीं

सबने तारीफ की जुल्फों की, मेरी कलम मां की झुर्री तक सिमटी रही,मैं ठिकाना बना सबका, सबकी नज़र मंजिल पर टिकी रही,टकराया मैं हर तूफान से, तेरी सलामती के लिए,मेरी नींव क्या हिली तेरी सीरत बदलती रही,मैं बदलता नहीं यही खासियत है मेरी,कच्ची ज़मीन में किसी इमारत की नींव डलती नहीं,तू रहा हमेशा अपनी पहचान […]

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मैं भीड़ में खो नहीं सकता

मैं भीड़ में खो नहीं सकता, मैं हर किसी का हो नहीं सकता, हाथ थाम लूं किसी का भी, ये आदत नहीं है मेरी, और जिसका पकड़ु,वो जुदा हो, ये हो नहीं सकता।। Note – इस कविता से जुड़े सर्वाधिकार रवि प्रताप सिंह के पास हैं। बिना उनकी लिखित अनुमति के कविता के किसी भी हिस्से को […]

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