नेशनल डेस्क: दिमागी नक्सलवाद’ (जिसे ‘अर्बन नक्सल’ भी कहा जाता है) एक ऐसा शब्द है जिसका उपयोग उन बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विचारकों के लिए किया जाता है, जो कथित तौर पर शहरों में रहकर देश विरोधी विचारधाराओं या नक्सली एजेंडे का समर्थन करते हैं। इस विवाद के समर्थकों का मानना है कि ये लोग सीधे हिंसा में शामिल न होकर, अपनी कलम, भाषणों और विमर्श (नैरेटिव) के माध्यम से युवाओं का ब्रेनवॉश करते हैं और समाज में सरकार व सुरक्षा बलों के खिलाफ असंतोष फैलाते हैं।
दूसरी ओर, आलोचक इस शब्द को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित मानते हैं। उनका तर्क है कि लोकतांत्रिक तरीकों से सरकार की नीतियों का विरोध करने वालों, मानव अधिकारों की बात करने वालों और आदिवासियों के हक की आवाज उठाने वालों की आवाज दबाने के लिए इस शब्द को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है। यह विवाद अभिव्यक्ति की आजादी और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच के नाजुक संतुलन को लेकर लगातार चर्चा में बना रहता है।
इस विषय को और गहराई से समझने और इसके विभिन्न पहलुओं को जानने के लिए कृपया नीचे दिए गए वीडियो को देखें:


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