
रक्षा डेस्कः भारत ने रक्षा उत्पादों के निर्यात में कदम बढ़ाते हुए सतह से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल प्रणाली को निर्यात करने की मंजूरी दे दी है। अब तक भारत रक्षा निर्यात के मामले में केवल डिफेंस से जुड़े पुर्जे या अन्य घटक आदि शामिल थे। बड़े प्लेटफार्मों या रक्षा उत्पादों का निर्यात कम था। मिसाइल प्रणाली के निर्यात को मंत्रीमंडल की मंजूरी मिलने से भारत को अपने रक्षा उत्पादों को बेहतर बनाने और उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी। 9 मित्र देशों ने इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है।
आकाशा मिसाइल का 96 प्रतिशत किया गया स्वदेशीकरण
आत्मनिर्भर भारत के तहत, भारत विभिन्न प्रकार के रक्षा प्लेटफार्मों और मिसाइलों के निर्माण में अपनी क्षमताओं को बढ़ा रहा है। आकाश देश की अहम मिसाइलों में से एक है। इसे बनाने में 96 प्रतिशत तकनीक भारतीय है।

आकाश मिसाइल की खुबियां
आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता 25 किलोमीटर तक है। वर्ष 2014 में इसे भारतीय वायु सेना में व उसके एक वर्ष बाद इसे भारतीय थल सेना में शामिल किया गया था।
कई मित्र देशों ने आकाश मिसाइल में दिखाई रूचि
भारतीय सेना में शामिल होने के बाद अंतर्राष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनी और एयरो इंडिया के दौरान कई मित्र देशों ने इसमें अपनी रुचि दिखाई। मंत्रिमंडल की मंजूरी से विभिन्न देशों द्वारा जारी RFI( Request For Information) आरएफपीमें भाग लेने के लिए भारतीय निर्माताओं को सुविधा मिलेगी।आकाश मिसाइल का एक्सपोर्ट वर्जन इंडियन आर्मी को मिले वर्जन से अलग होगा।
तेजी से रक्षा उत्पादों को एक्सपोर्ट की मंजूरी के लिए कमेटी की गठित
आकाश मिसाइलों के अलावा अन्य रक्षा उत्पादों को तेजी से मंजूरी मिले। इसके लिए कैबिनेट ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की एक कमेटी गठित कर दी है। इससे आकाश मिसाइल के साथ-साथ अन्य प्रमुख प्लेटफार्मों जैसे तटीय निगरानी प्रणाली, रडार और एयर प्लेटफार्मों में भी रुचि दिखाने वाले देशों को इनका निर्यात किया जा सके।
5 बिलियन डॉलर के रक्षा निर्यात का है लक्ष्य
भारत सरकार ने 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रक्षा निर्यात के लक्ष्य है। इसे प्राप्त करने और मित्र देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए उच्च मूल्य वाले रक्षा प्लेटफार्मों के निर्यात पर ध्यान केंद्रित करने का विचार किया है।


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