
नेशनल डेस्क: जहां एक ओर देश में खुदरा महंगाई दर घटकर सात साल के न्यूनतम स्तर 1.55% पर आ गई है, वहीं पंजाब में यह दर 3.53% रही, जिससे यह देश के महंगे राज्यों में शामिल हो गया है। इसका मतलब है कि पंजाब के उपभोक्ताओं को बाकी राज्यों की तुलना में ज़्यादा जेब ढीली करनी पड़ी।
पंजाब में लगातार ऊंची कीमतें
राष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में गिरावट के बावजूद पंजाब में खाद्य एवं पेय पदार्थ, कपड़े-जूते, आवास, और ईंधन-प्रकाश जैसी ज़रूरी श्रेणियों में ऊंची कीमतें बनी हुई हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। इससे संकेत मिलता है कि यहां महंगाई का दबाव लगातार बना हुआ है।
राष्ट्रीय स्तर पर महंगाई में गिरावट
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के जुलाई के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, देश में महंगाई में कमी की सबसे बड़ी वजह खाद्य महंगाई में तेज गिरावट रही। ऑल-इंडिया कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) -1.76% पर आ गया, जो जनवरी 2019 के बाद का सबसे निचला स्तर है। दाल, सब्ज़ियां, अनाज, अंडे और चीनी की कीमतों में गिरावट ने इस राहत में अहम योगदान दिया।
पड़ोसी राज्यों से तुलना
पंजाब की संयुक्त (ग्रामीण + शहरी) सीपीआई महंगाई दर 3.53% रही, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। इसके मुकाबले हरियाणा में यह 1.61% और हिमाचल प्रदेश में 2.21% रही। ग्रामीण पंजाब में महंगाई 4.12% रही, जबकि हरियाणा में 1.72% और हिमाचल में 2.27% रही। शहरी पंजाब में यह दर 2.77% रही, जो हरियाणा (1.51%) और हिमाचल (2.18%) से अधिक है।
राज्यों की रैंकिंग
देशभर में 50 लाख से अधिक आबादी वाले राज्यों में केरल 8.89% के साथ सबसे ऊपर रहा, इसके बाद जम्मू-कश्मीर 3.77%, पंजाब 3.53%, कर्नाटक 2.73% और महाराष्ट्र 2.28% पर रहे। राष्ट्रीय ग्रामीण महंगाई दर 1.18% और शहरी 2.05% रही, जो जून की तुलना में काफी कम है। खाद्य महंगाई ग्रामीण ( -1.74%) और शहरी ( -1.90%) दोनों में नकारात्मक रही।
पंजाब का हालिया रिकॉर्ड
पंजाब में महंगाई दर जनवरी में 4.28%, फरवरी में 3.55%, मार्च में 3.65%, अप्रैल में 4.09%, मई में 5.21% और जून में 4.67% रही थी। जुलाई में इसमें गिरावट आई, लेकिन यह अभी भी राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।


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