सेकुलरिज्म का पैमाना ?

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rajnath singh

इस बार लोकसभा के सत्र की शुरुआत इसी सेकुलरिज्म शब्द से हुई। हमारे देश के गृह मंत्री जी ने इस पर काफी कुछ कहा, पर इंग्लिश शब्दकोष में सेक्युलर शब्द का अर्थ होता है “जो धार्मिक और आध्यात्मिक मामलो से जुड़ा न हो”। धर्म अपने आप में एक बड़ा शब्द है और इसका अर्थ भी व्यापक है। इसे एक शब्द और सन्दर्भ में लेकर हम नहीं सोच सकते धर्म का अर्थ जहाँ तक हमारे वेदों और धर्मग्रंथों के अनुसार समझने की कोशिश करें, तो यह किसी भी पूजा पद्धति से सम्बंधित नहीं है जबकि यह सम्बंधित है आपके कर्तव्य से, आप किसी भी स्थिति में हो आपका आचार विचार और व्यवहार क्या होना चाहिए उसके आधार को तय करता है, आपका धर्म। हालांकि कई लोग जो धर्म से जुड़े विद्वान है। वह कहते है, जो धारण किया जा सके वही धर्म है अर्थात जो आप अपने व्यवहार में अच्छी बातों को ला सके। इस बारे में हर किसी की अपनी राय है। किसी के लिए क्या धर्म है? वह देश काल और परिस्थिति पर निर्भर करता है।

आज के सन्दर्भ में हम पूजा पद्धति को ही धर्म कहते है और इसके मानने वाले भी अलग अलग है जैसे हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई लेकिन इनकी जब धार्मिक भावनाएं आहत होती है तो सबकी प्रतिक्रिया अलग अलग होती है। कोई हिंसा का सहारा लेता है तो कोई हिंसात्मक वाणी का। इस पर हर पार्टी की प्रतिक्रिया भी उसके धर्म के आधार पर अलग अलग आती है। कहते है सीधे पेड़ को सबसे पहले काटा जाता है। यही आज भारत में बहुसंख्यक समाज के साथ हो रहा है। बहुसंख्यक समाज के खिलाफ बोलना इनकी आस्थाओं का मज़ाक बनाना बहुत आसान है और वह विचारों की स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है।

जानते है पैमाना क्या है ? सेक्युलर होने का

इसके अर्थ के बारे में हम पहले ही बात कर चुके है परन्तु इसका पैमाना क्या है कौन-कौन सेक्युलर की श्रेणी में आता है आइये जरा समझने की कोशिश करते है।

जो हिन्दुओं की आस्थाओं पर सवाल खड़ा करें, जो हिन्दू मान्यताओं को ना माने और उन्हें पाखंड कहे, जो हिन्दू धर्म की आलोचना करें, जो श्री राम को काल्पनिक कहे, जो विकास की सिर्फ बात कहे और उसके लिए हिन्दुओं की आस्थाओं के केंद्र सेतु पूल को तोड़े, चाहे पर्यावरण विद्वान भी इस पर अपना विरोध दर्ज कराए, जो मंदिरों को तो तोड़े पर सडको के किनारे बढ़ते पीरो के होते अतिक्रमण को ना रोके, जो भारत के खिलाफ बात करें या जो ये कहे की श्री राम इस देश में नहीं पाकिस्तान- अफगानिस्तान सीमा पर पैदा हुए है, या जो ये कहे भारत माता डायन है वो लोग जो ये कहे मोहम्मद बिन कासिम, महमूद गजनवी, मोहम्मद गौरी, औरंगजेब हमारे हीरो है, दुनिया जानती है इन हीरो ने लाखों लोगों को मारा, लाखों को जबरदस्ती इस्लाम कबूल कराया या वो जो हिन्दु देवताओं का फिल्मों में मज़ाक बनाते है या वो जो हिन्दू देवी देवताओं की भद्दी तस्वीरें बनाते है या जो कहे मैं मुस्लिम हूँ आदि आदि।

अब जानते है कि कौन सांप्रदायिक है ?

वही सांप्रदायिक है जो अपने आपको हिन्दू कहता है, या वो सांप्रदायिक है जो देश में सभी धर्मों के लिए एक क़ानून चाहता है, या वो जो कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एक ध्वज की बात करता हो, जो ये सवाल उठाता हो की जब कश्मीर में पंडितों को कब बसाया जाएगा, जो महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी, गुरु तेग बहादुर, हरी सिंह नलवा जैसे अनेक बहादुरों और देशभक्ति से लबालब लोगों की जीवनी पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात करता हो, आदि आदि।

ऐसे ओर भी उदाहरण को शामिल किया जा सकता है पर मैं अपने लेखन को यहाँ विराम देना चाहूंगा और आप से ये चाहूंगा कि आप भी अपने आस पास जो घटित हो रहा है उस पर ध्यान देंगे तो समझ जाएंगे की कौन सेक्युलर है ?

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