
अम्बाला डेस्कः शौर्य चक्र विजेता शहीद लक्ष्मण सिंह के परिवार की स्मृति द्वार बनाने की वर्षों पुरानी मांग को प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज ने स्वीकार कर लिया है। इस संबंद में शहीद लक्ष्मण सिंह के बेटे रजत राणा को एक स्वीकृति पत्र भी दिया जा चुका है। इसी कड़ी में लक्ष्मण सिंह के शहीदी दिवस (18 फरवरी) पर गुरुवार को ही स्मृति द्वार बनाने की नीव रख दी गई। यह द्वार बब्याल ऑटो स्टैंड के नजदीक बनाने की योजना है। नीव पूजन कार्यक्रम के दौरान बब्याल के कई सम्मानित व्यक्ति भी मौजूद रहे।

रजत राणा ने बताया कि वर्ष 2006 में उनके पिता की ड्यूटी लेह लदाख में थी। भारी बर्फबारी के दौरान उनकी ड्यूटी बर्फ हटाने की थी। बर्फ हटाने के दौरान अचानक बर्फीला तूफान आ गया। उसी में वह और उनकी टीम दब गए। 6 महीनें तक उनका कोई पता नहीं चला। फिर एक दिन पत्र आया कि उनका शव मिला है। 31 जनवरी, 2006 को तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने शहीद लक्ष्मण सिंह को शौर्य चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान उनकी पत्नी मीना कुमारी को सौंपा गया।

हुड्डा ने किया 7 लाख देने का ऐलान, लेकिन ऐलान ही रह गया
रजत राणा ने बताया कि वर्ष 2006 में प्रदेश में भुपिंद्र सिंह हुड्डा की सरकार थी। उन्होंने 7 लाख देने का ऐलान किया था। लेकिन वर्षों गुजर जाने के बाद भी कुछ नहीं मिला। बड़े भाई अजीत राणा ने कई बार इस संबंध में सरकार को पत्र लिखे। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
बॉस ने की बहुत मदद
रजत ने बताया कि मैं कैंट की प्राइवेट कम्पनी मे नौकरी करता हूं। वर्ष 2014 में मैंने अपने बॉस डॉ. अनिल जैन से इस संबंध में बात की तो उन्होंने मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस संबंध में पत्र लिखे। इसका परिणाम यह रहा है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल सरकार ने हमें 35 हजार राशि दी। साथ ही मेरी मां के नाम सालाना 1 लाख रुपये की पेंशन लगा दी गई।


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