एक नजर में Budget 2026-27: रक्षा पर सबसे बड़ा फोकस, खर्च बढ़ा लेकिन घाटा काबू में

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नेशनले डेस्क: केंद्र सरकार के ताज़ा बजट एट अ ग्लांस दस्तावेज़ के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार का कुल खर्च बढ़कर ₹53.47 लाख करोड़ हो जाएगा। सरकार ने इस बार साफ संकेत दिया है कि उसकी प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और दीर्घकालीन विकास है। वहीं सब्सिडी और गैर-ज़रूरी खर्च पर नियंत्रण रखने की कोशिश भी जारी है।


कुल खर्च कितना और कहां जाएगा?

बजट अनुमान 2026-27 में:

  • कुल व्यय: ₹53.47 लाख करोड़
  • पूंजीगत व्यय: ₹12.21 लाख करोड़
  • प्रभावी पूंजीगत व्यय: ₹17.14 लाख करोड़

सरकार ने साफ किया है कि वह “खपत” से ज़्यादा निर्माण और निवेश पर ध्यान दे रही है, ताकि अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक गति मिल सके।


क्या महंगा हुआ? (सरकारी खर्च के मोर्चे पर)

1️⃣ रक्षा (Defence)

  • 2025-26 (संशोधित): ₹5.68 लाख करोड़
  • 2026-27 (बजट अनुमान): ₹5.95 लाख करोड़

रक्षा बजट में बढ़ोतरी का मतलब है:

  • हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद
  • लड़ाकू विमान और एयरो-इंजन
  • सीमा क्षेत्रों में निर्माण
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास पर ज़ोर

2️⃣ ब्याज भुगतान

  • ₹14.04 लाख करोड़

सरकार पर कर्ज़ का बोझ बना हुआ है और ब्याज भुगतान कुल खर्च का बड़ा हिस्सा खा रहा है।

3️⃣ इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा

  • परिवहन: ₹5.99 लाख करोड़
  • ऊर्जा क्षेत्र: ₹1.09 लाख करोड़

क्या सस्ता हुआ या सीमित रखा गया?

🔹 पेट्रोलियम सब्सिडी

  • ₹12,085 करोड़
  • पहले की तुलना में सीमित, यानी ईंधन पर सीधी सरकारी मदद घटाई गई।

🔹 सब्सिडी पर नियंत्रण

  • उर्वरक और खाद्य सब्सिडी ज़रूरी स्तर पर रखी गई
  • सरकार की रणनीति: लक्षित लाभार्थी, कम रिसाव

विभाग-वार खर्च: पैसा कहां जा रहा है?

कुल खर्च का प्रतिशत वितरण:

  • राज्यों का कर हिस्सा: 22%
  • ब्याज भुगतान: 20%
  • रक्षा: 11%
  • केंद्रीय क्षेत्र योजनाएँ: 17%
  • केंद्र प्रायोजित योजनाएँ: 8%
  • प्रमुख सब्सिडी: 6%

यह दिखाता है कि केंद्र सरकार राज्यों को भी बड़ी हिस्सेदारी दे रही है, लेकिन सुरक्षा और राष्ट्रीय प्राथमिकताएँ भी बराबर चल रही हैं।


रक्षा बजट पर खास नजर

2026-27 में रक्षा क्षेत्र के अंदर:

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास: ₹17,250 करोड़
  • विमान और एयरो इंजन: ₹63,734 करोड़
  • अन्य रक्षा उपकरण: ₹82,218 करोड़

साफ संदेश: सरकार “तनख्वाह-पेंशन” से आगे बढ़कर आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग पर ध्यान दे रही है।


घाटा कितना और कितना काबू में?

  • राजकोषीय घाटा: 4.3% (GDP का)
  • प्राथमिक घाटा: 0.7%
  • प्रभावी राजस्व घाटा: 0.3%

सरकार खर्च बढ़ाने के बावजूद वित्तीय अनुशासन बनाए रखने का दावा कर रही है।


बजट 2025-26/2026-27 यह संकेत देता है कि सरकार का फोकस सुरक्षा + विकास है। आम आदमी को सीधी राहत सीमित है, लेकिन रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश से लंबे समय में अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को मज़बूती मिलने की उम्मीद है।

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