अम्बाला डेस्क: सड़कों पर आए दिन भीषण हादसे हो रहे हैं। हाल ही में दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की टक्कर हुई, जिसमें कार सवार 6 लोगों की मौत हो गई। जांच में सामने आया कि बस ड्राइवर बस को करीब 8 किलोमीटर तक गलत दिशा में चला रहा था। इसके चलते इतना बड़ा हादसा हुआ। ऐसी दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। जैसे: रेलवे विभाग में हर लॉबी में एक श्वास परीक्षण यंत्र (Breath Analyzer)
रखा होता है। लॉबी वह स्थान है जहां ड्राईवर एवं गार्डों की ड्यूटी निर्धारित होती है। हर एक ड्राइवर का ट्रेन चलाने से पहले श्वास परीक्षण यंत्र से टेस्ट किया जाता है। इस यंत्र से परीक्षण करने से पता लग जाता है कि ड्राईवर ने शराब पी है या नहीं।
अगर ड्राईवर ने शराब पी है तो उसे डयूटी पर नहीं लिया जाता है। यही प्रक्रिया रोड़वेज के प्रत्येक बस डिपो में भी लागू कर देनी चाहिए। ट्रैफिक पुलिस के पास भी यह यंत्र पहले से ही होता है। उन्हें भी इसका सख्ती से पालन करना चाहिए।
रोड़वेज के सुपरवाइजर एवं अधिकारियों को अपने कर्मचारी के बारे में ज्ञात होता है। पता
रहता है कि कौन ड्राईवर शराब के नशे का आदि है। इस दुर्घटनाग्रसत बस के ड्राईवर का 15 बार चलान कट चुका है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह ड्राइवर गलतियां करने का आदि बन चुका है। ऐसे गैरजिम्मेदार चालक को वालंटरी रिटायरमेंट देकर सेवा से हटा देना चाहिए था।
ड्राइवर की चुनाव प्रक्रिया में सुधार किया जाना चाहिए। इनकी शैक्षणिक योग्यता 10वीं से बढ़ कर 10+2 कर देनी चाहिए। ट्रैफिक
नियमों का खुला उल्लंघन ही जानलेवा दुर्घटनाओं का कारण बनता है। पूरा सिस्टम
अपग्रेड होना चाहिए।
-सोम प्रकाश कौशिक (ये लेखक के निजी विचार हैं)


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